Tuesday, 12 December 2017

|| आँसू ||

बहुत राहत महसूस हो रही है,
काफ़ी अच्छा लग रहा है, अब,
काफ़ी अरसे बाद बरसे हैं,
हलकी सी ठंडक हो गयी है, अचानक,
बहुत रंज भी हो रखी थी,
पर अब सब कुछ,
साफ़ और नया सा लग रहा है | 
ये आँसू भी क्या चीज है.....

Friday, 10 November 2017

|| शब्द ||

ख़याल उमड़ते रहते है,
दिन-रात...
और राह देखते है, शब्दो से मिलने की,
एक एक अक्षर को जोड़कर...
इन्हे समेटने की कोशिश करता हूँ,
लेकिन बड़े नटखट है ये,
लड़ते है, झगड़ते है आपस में,
तो कभी प्यार से जुड़ जाते है,
कुछ तो गमंड में चूर है...
कुछ सीधे सरल...
कुछ कुछ इंसानो सी ही फ़ितरत है इन शब्दो की...
इस से पहले इनहे कोई बहाना मिल जाए...
खुली दवात के सूखने का,
कागज़ पे इन शब्दो को उतार लेता हूँ |

Sunday, 27 August 2017

!! उसकी रज़ा क्या है ? !!

कभी नारियल लेकर,
तो कभी प्रसाद और हार लेकर,
हर रोज़ इबादत करने जाते हो...
उसके दर पर,
कभी अपना सिर झुकाते हो,
कभी अपनी ख्वाहिशों के लिए...
हर रोज़ उसकी दर पर भटकते हो...
कभी उससे परेशां करते हो...
हर रोज़ आपनी नयी उम्मीद लगाते हो...
आख़िर ए बँधे तू चाहता क्या है ?
कभी अपने खुदा से भी पूछो,
आखिर उसकी रज़ा क्या है ?

Friday, 21 July 2017

!! अलविदा, पर कहता…कैसे !!

घर छोड़ने से कुछ ही दिन पहले सामान बाँध लिया था....
आँखों के सूटकेस में यादो को अच्छी तरह डाल लिया था....
एक दो बार सूटकेस को खोल कर तसल्ली भी कर ली थी....
कि कही कुछ छूट तो नही गया है....
सोचा की अब अलविदा कह लूँ ....
दरवाजे पर पहुँच आखिरी बार देखने को मुड़ा तो मालूम हुआ....
बस कुछ खास सामान ही साथ ले जा रहा हूँ....
अभी तो मकान में बहुत सारा सामान बाकी पड़ा है....
फिर भी, सोचा की अलविदा कह लूँ, पर कहता…कैसे.... |

Wednesday, 31 May 2017

|| दोस्त ||

आज एक बहुत पुराना दोस्त मिला...
पहेले तो मैं उससे पहचान ही नही पाया...
फिर, यादो के पिटारे से धूल हटाई तो याद आया...
साथ में बिताए हुए...वो हसीन पल...
मैंने सोचा...बाकी की बाते चाय पर की जाए...
चाय पीते-पीते मैंने और यादे ताज़ा की...
उस किताब को पढ़ कर...
जो आज सफाई करते वक़्त अलमारी से मिली थी ||

Wednesday, 22 March 2017

!! नानी !!

उन्नीसो अठासी की बात है...
शायद कुछ ही दिनो का था मैं...
इसलिए ठीक से कुछ याद नही मुझे...
माँ से पहले शायद आप ही थी...
जिसने मुझे गोद में लिया होगा...
मुझे खिलाया भी होगा...
नींद ना आने पर मुझे लोरी गाकर...
सुलाया होगा...
और नींद आने पर आप...
मेरे पहरेदार बन के...
मेरे इर्द गिर्द खड़े भी रहे होंगे...
मेरी हर इच्छा आपने पूरी की होगी...
मेरी बदमाशियां मम्मी से छिपाई भी होगी...
मेरे बाल भी...
कंघी किये होंगे...
तो कभी मेरे चेहरे पे...
लीपा पोती भी की होगी...
आपके बार बार बुलाने पर ही तो...
अपने नाम को पहचान पाया होऊंगा...

कुछ याद नहीं है मुझे...
पर यकीन से कह सकता हूँ
की ऐसा ही हुआ..... 

Sunday, 19 March 2017

!! फीते !!

दोनों पैरों के फीते,
आपस मे बाँधली है,
साल दर साल,
होसले और विश्वास से, 
ये मज़बूत होती जाएगी,
थोड़ा थोड़ा कर के धीरे धीरे,
मंज़िल की ओर बढ़ते रहेंगे,
मगर साथ साथ,
वरना उलझ के गिर पड़ेंगे कभी ।

Wednesday, 8 March 2017

!! उम्मीद !!

दिन,
मुझे तुमसे उम्मीद है...
सुरंग के दूसरे छोर पर ...
रात इंतज़ार कर रही है...
पर मेरा सच्चा साथी तू है...
थक कर जब राह में,
मैं रुक जाता हू...
तो तू मुझे हौसला देता है...
पीछे देखता हू...
तो यकीन नही होता के...
इतना पास आ गया मंज़िल के...
शाम होते होते...
उमीद कुछ कम हो जाती है...
कुछ देर को ये अकेलापन...
कई सवाल पूछता है...
फिर चुप हो जाता है...
शायद ये सोचकर के अभी...
उम्मीद बाकी है | 

Friday, 3 March 2017

!! वृद्धाश्रम !!

आज दोस्त एक महखाने में ले गया...
औरो से कुछ अलग था ये महखाना...
एक अलग सी दुनिया थी...
बूढ़ी आखो में जीने का नशा देखा मेने यहा...
ज़िंदगी की टेबल पर...
खुशी के जाम लिए जा रहे थे...
सबके चेहरो पर खुशी थी...
ओर शायद शिकन...
झुर्रियों में बदल गयी थी...
उसी टेबल पर कुछ लोग...
आपने ख़यालो के शॉट्स ले रहे थे...
और कुछ अभी भी बचपन  के नशे में डूबे थे...
सिगरेट के धुएं  की जगह...
अगरबत्ती का धुंआ था...
शायद इस धुएं में उनकी फिकरें उड़ रही हैं...
सब लोग यहा इतने मस्त थे..
कोई अपने अतीत में जाना ही नहीं चाहता था..
अपने आज की खुमारी को जी रहे है ये लोग...
जब भी आप को समय मिले...
हो आइए इस महकने में...
नाम "वृद्धाश्रम " |

Wednesday, 1 March 2017

!! गणित !!

1
7 8
2 2
---
7 0

---

ज़िंदगी की गणित
अभी सिख रहा हू
बस जो सपने है मेरे 
उसे आगे के लिए बचा लेता हू...
खुशी के जो पल हे, उन्हे जोड़ता हू..
और गम को गटा लेता हू...
और आज तक का हिसाब फिर से "शून्य" |

Sunday, 26 February 2017

!! दोस्त !!

कैसे भूलु वो दिन जो बिताए यारो के साथ,
वो कॅफेटीरिया की मस्ती,
वो यारो का प्यार,
वो जिन्दादिली,
वो यारो का साथ,
वो बाइक की रेस,
वो लड़की वाला केस, 
वो सर का डाटना, वो बंक मारना,
वो प्रॉमिस, जो प्रॉमिस रह गये,
कैसे भूलु वो दिन जो बेटाए यारो के साथ,
वो बियर पीकर टल्ली होना,
वो यारो क सांग भांगड़ा पाना,
वो बारिश की पहली बूँध,
वो बाइक की चाबी छुपा कर बोलना, अब ढूंड,
वो पहला प्यार,
वो लेना दोस्तो से पैसे उधार,
वो एग्ज़ॅम का टेंशन, वो कूल रहना का  टशन,
वो यारो के संग टुर, अब सब है मुझसे दूर,
कैसे भूलु वो दिन जो बिताए यारो के साथ |




Friday, 24 February 2017

!! मां !!

तेरी हर एक बात आज याद आती है,
तू पास नही तो, तेरी याद सताती है,
मैं कभी देखलता नही, पर तुझसे,
बहुत प्यार करता हू मां,
तेरा वो डाटना, वो धूप लगने पर,
आँचल में ढक लेना,
रात मैं नींद ना आए तो,
गोद मैं लेकर कहानी सुनना,
तेरी हर एक बात आज याद आती है,
तू पास नही तो तेरी याद सताती ह,
मेरे साथ परीक्षा मैं रात भर जागना,
मेरी खुशी के लिए सब कुछ तयाग्ना, 
कैसे चुका पाउँगा, मैं वो क़र्ज़,
वो एहसान जो तुमने मुझ पर किए है मां,
तेरी हर एक बात आज याद आती है,
तू पास नही तो तेरी याद सताती है |

Sunday, 19 February 2017

!! अर्जी !!

एक अर्जी देने दर पर आया था मलिक तेरे...
तुज़से फरियाद करने वालो की कतार बड़ी लंबी है...
मूज़े पता है दर पर तेरे रिश्वत चलती नही...
पर फिर भी, कुछ रिश्वत लेकर आया हू...
कुछ दुआए तेरे पास रखी है मेरी, ओर कुछ सजदे साथ लाया हू...
वक़्त मिले तो देख लेना अर्जी मेरी...
मैं तेरे दर पर ही ठहरा हू |

Thursday, 16 February 2017

!! माहीने !!

जो कभी सच्ची दोस्त थी...
अब महीनो, उसे मुलाकात नही होती...
ज़िंदगी के माहीने बदल गये है, शायद...
अभी भी मिलने के इंतज़ार में...
शीशों के पीछे से हसरातो से तकती है...
यादे धुंधली सी देखाई पड़ती है अब...
वो किताबो के साथ बिताई सोहबतो वाली शामे....
अब कंप्यूटर के सामने बीत जाती है |