तुमसे बिना कुछ सुने...
उससे मुजरिम करार दे दिया...
ये आदलत कहा से आई ?
पराई है अगर बेटी...
तो सोच...
ये अमानत तेरे दर कहा से आई ?
चार दीवारी में जो बाप कैद हो गया...
उस बाप को आज मौत की ज़मानत कहा से आई ?
जिस अफ़सर का घर चल जाता है कुछ ले देकर...
उस को तनख्वाह देनी की ज़रूरत कहा से है आई ?
जज़्बात ऐसे ही लिखता रहूँगा मैं..
और तुम सोचते रहना...
इसके क़लम में...
इतनी ताकत कहा से आई ?
उससे मुजरिम करार दे दिया...
ये आदलत कहा से आई ?
पराई है अगर बेटी...
तो सोच...
ये अमानत तेरे दर कहा से आई ?
चार दीवारी में जो बाप कैद हो गया...
उस बाप को आज मौत की ज़मानत कहा से आई ?
जिस अफ़सर का घर चल जाता है कुछ ले देकर...
उस को तनख्वाह देनी की ज़रूरत कहा से है आई ?
जज़्बात ऐसे ही लिखता रहूँगा मैं..
और तुम सोचते रहना...
इसके क़लम में...
इतनी ताकत कहा से आई ?