Sunday, 25 September 2016

!! बाज़ार !!

आज इतवार है..
चलो आपको गाव का हॉट गुमा लाउ...
ये है यहा का हॉट...
दूर दूर से वायापारी आते है यहा...
चलो, इन व्यापारियों के बारे में बताता हूँ।
ये नामी मिठाई की दुकान;
माल कुछ खास नहीं,
बस नाम से चल रही है।
वो कहते है ना...
उची दुकान फीका पकवान,
ये चाट बाज़ार;
सिर्फ वही लोग आते हैं
जिन्हें चटकारे पसन्द है।
ये बीज़ू बानिए की दुकान,
फिक्स ग्राहक हैं इनके।
हर महीने का राशन उठाते हैं यहाँ से।
वो पन्ना सेठ की दुकानें;
खुद आराम फरमाते हैं
और दूसरों के काम पर कमाते हैं।
ये खिलोने की दुकान,
बच्चों का मंन खूब लुभाती है...
इस दुकान पर इतना शोर क्यो???
अरे ये तो मुखौटे की दुकान है,
आज कल बहोत चलती है..
लोग यहा मुखौटा लेने आते है..
खुशी के, दुख के...
इस साहित्य के इस बाज़ार में
एक कोने में छोटी सी दुखन मेरी है..
आज कल चलती नही है..
इस लिए धूल मिट्टी लगी है...
कोई आता नही...
आजकल मुस्कुराहते कोई खरीदता नही है....