Tuesday, 13 August 2019

जज़्बात

तुमसे बिना कुछ सुने...
उससे मुजरिम करार दे दिया...
ये आदलत कहा से आई ?
पराई है अगर बेटी...
तो सोच...
ये अमानत तेरे दर कहा से आई ?
चार दीवारी में जो बाप कैद हो गया...
उस बाप को आज मौत की ज़मानत कहा से आई ?
जिस अफ़सर का  घर चल जाता है कुछ ले देकर...
उस को तनख्वाह देनी की ज़रूरत कहा से है आई ?
जज़्बात  ऐसे ही लिखता रहूँगा मैं..
और तुम सोचते रहना...
इसके क़लम में...
इतनी ताकत कहा से आई ?

Saturday, 16 February 2019

दिल की किताब













दिल की किताब, उसमें पन्ने हज़ार,
कुछ पन्ने ख़्वाबों के, वो मेरे इरादों के,
वो रंगीन पन्ने... पिछली यादों के,
कुछ पन्ने भीगे से, मेरी ज़िन्दगी में आए तूफनो से...
कुछ पन्ने फटे से, वो बुरे एहसासों के...​​
कुछ पन्ने ख़ाली हैं.... 
क्योंकि लिखना अभी बाक़ी हैं ।