किसी के लिए ताकत,
किसी के लिए ज्ञान,
और किसी के लिए काल हूँ,
हाँ मैं वही दशानंद रावण हूँ।
माना कि मैं गलत था,
अपने मान के लिए,
किसी औरत को उठा लाया था,
पर वह फिर भी मर्यादा पुरषोतम,
जो किसी और के कहने पर,
अपने झूठे मान के लिए,
उसे फिर वन में छोड़ आया था।
दुःख अपनी हार का नहीं,
इस बात का है,
हर साल मेरा पुतला,
वो जलाते है, जो रोज़
किसी औरत के मान को मारते है।
मैं सतयुग का राक्षस हूँ,
कलयुग का मानव नही,
शायद इस लिए, सीता को राम ने पाक ही पाया था |
किसी के लिए ताकत,
किसी के लिए ज्ञान,
और किसी के लिए काल हूँ,
हाँ मैं वही दशानंद रावण हूँ।
किसी के लिए ज्ञान,
और किसी के लिए काल हूँ,
हाँ मैं वही दशानंद रावण हूँ।
माना कि मैं गलत था,
अपने मान के लिए,
किसी औरत को उठा लाया था,
पर वह फिर भी मर्यादा पुरषोतम,
जो किसी और के कहने पर,
अपने झूठे मान के लिए,
उसे फिर वन में छोड़ आया था।
दुःख अपनी हार का नहीं,
इस बात का है,
हर साल मेरा पुतला,
वो जलाते है, जो रोज़
किसी औरत के मान को मारते है।
मैं सतयुग का राक्षस हूँ,
कलयुग का मानव नही,
शायद इस लिए, सीता को राम ने पाक ही पाया था |
किसी के लिए ताकत,
किसी के लिए ज्ञान,
और किसी के लिए काल हूँ,
हाँ मैं वही दशानंद रावण हूँ।