Sunday, 20 September 2015

!! कब्रिस्तान !!

गहरा है हर तरफ सन्नाटा,
भय का इकलौता साम्राज्या ये,
समय जैसे थम सा गया यहा...
जीवन जब रात के अंधेरे में सोता है,
इस ख़ौफ्फ के मंज़ार में,
सुकून  की तलाश मे कोई भटकता है,
ख़ौफ्फ उनका मौत से भयानक है,
इंसान की समझ से परे इनकी काया,
कब्रिस्तान में इन का साया...
आत्मा जो कभी मरती नही,
मोक्ष मृत्यु से पहले मिलता नही,
कब्रिस्तान जेसे...
प्रेतों का घराना,
पिशाछो का ठिकाना,
भूतो का साम्राज्या है,
रूहों का जैसे वास...
कब्रिस्तान...

Wednesday, 9 September 2015

!! सपना !!

मेरी बालकनी से उस पहाड़ तक
एक सड़क जाती है ।
टहल रहा हूँ बेफिक्री में
दूर परे नीले रस्ते पे,
चाँद भी साथ साथ
चहलकदमी करता है,
ना जाने साथ देने को या फिर रौशनी!
बोझ नहीं खाली जेबों का,
बस चलता जा रहा हूँ |
दूर परे नीले रस्ते पे,
मेँ थकता नहीं,
पर चाँद तो आखिर चाँद है।
बेचारा थक जाता है |
थोड़ा सास लेता है,
थोड़ा में भी रुक कर,
बादलो को सहला लेता हूँ।
दूर खड़ा वो पहाड़,
सब कुछ देख रहा होता है।
नजदीक जाकर उसे भी,
गले लगाता हूँ।
कुछ पेड़ मिलते हैं,
उनके भी हाल पूछ लेता हूँ |
कितना अच्छा लगता  है यहा,
मुसकान और रंगो से,
अपना बस्ता भर रहा हूँ |
सोच रहा हूँ पूरी दुनिया
खरीद ले ऐसा ही बस्ता,
और चले फिर उस रस्ते पे
महंगे गम बाकी सब सस्ता |
मेरी बालकनी से उस पहाड़ तक
एक सड़क जाती है,
जहां पे मिल जाती हैं
सच्चाइयां सपनों से।