Sunday, 20 September 2015

!! कब्रिस्तान !!

गहरा है हर तरफ सन्नाटा,
भय का इकलौता साम्राज्या ये,
समय जैसे थम सा गया यहा...
जीवन जब रात के अंधेरे में सोता है,
इस ख़ौफ्फ के मंज़ार में,
सुकून  की तलाश मे कोई भटकता है,
ख़ौफ्फ उनका मौत से भयानक है,
इंसान की समझ से परे इनकी काया,
कब्रिस्तान में इन का साया...
आत्मा जो कभी मरती नही,
मोक्ष मृत्यु से पहले मिलता नही,
कब्रिस्तान जेसे...
प्रेतों का घराना,
पिशाछो का ठिकाना,
भूतो का साम्राज्या है,
रूहों का जैसे वास...
कब्रिस्तान...

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