मेरी बालकनी से उस पहाड़ तक
एक सड़क जाती है ।
टहल रहा हूँ बेफिक्री में
दूर परे नीले रस्ते पे,
चाँद भी साथ साथ
चहलकदमी करता है,
ना जाने साथ देने को या फिर रौशनी!
बोझ नहीं खाली जेबों का,
बस चलता जा रहा हूँ |
दूर परे नीले रस्ते पे,
मेँ थकता नहीं,
पर चाँद तो आखिर चाँद है।
बेचारा थक जाता है |
थोड़ा सास लेता है,
थोड़ा में भी रुक कर,
बादलो को सहला लेता हूँ।
दूर खड़ा वो पहाड़,
सब कुछ देख रहा होता है।
नजदीक जाकर उसे भी,
गले लगाता हूँ।
कुछ पेड़ मिलते हैं,
उनके भी हाल पूछ लेता हूँ |
कितना अच्छा लगता है यहा,
मुसकान और रंगो से,
अपना बस्ता भर रहा हूँ |
सोच रहा हूँ पूरी दुनिया
खरीद ले ऐसा ही बस्ता,
और चले फिर उस रस्ते पे
महंगे गम बाकी सब सस्ता |
मेरी बालकनी से उस पहाड़ तक
एक सड़क जाती है,
जहां पे मिल जाती हैं
सच्चाइयां सपनों से।
एक सड़क जाती है ।
टहल रहा हूँ बेफिक्री में
दूर परे नीले रस्ते पे,
चाँद भी साथ साथ
चहलकदमी करता है,
ना जाने साथ देने को या फिर रौशनी!
बोझ नहीं खाली जेबों का,
बस चलता जा रहा हूँ |
दूर परे नीले रस्ते पे,
मेँ थकता नहीं,
पर चाँद तो आखिर चाँद है।
बेचारा थक जाता है |
थोड़ा सास लेता है,
थोड़ा में भी रुक कर,
बादलो को सहला लेता हूँ।
दूर खड़ा वो पहाड़,
सब कुछ देख रहा होता है।
नजदीक जाकर उसे भी,
गले लगाता हूँ।
कुछ पेड़ मिलते हैं,
उनके भी हाल पूछ लेता हूँ |
कितना अच्छा लगता है यहा,
मुसकान और रंगो से,
अपना बस्ता भर रहा हूँ |
सोच रहा हूँ पूरी दुनिया
खरीद ले ऐसा ही बस्ता,
और चले फिर उस रस्ते पे
महंगे गम बाकी सब सस्ता |
मेरी बालकनी से उस पहाड़ तक
एक सड़क जाती है,
जहां पे मिल जाती हैं
सच्चाइयां सपनों से।
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