Sunday, 27 August 2017

!! उसकी रज़ा क्या है ? !!

कभी नारियल लेकर,
तो कभी प्रसाद और हार लेकर,
हर रोज़ इबादत करने जाते हो...
उसके दर पर,
कभी अपना सिर झुकाते हो,
कभी अपनी ख्वाहिशों के लिए...
हर रोज़ उसकी दर पर भटकते हो...
कभी उससे परेशां करते हो...
हर रोज़ आपनी नयी उम्मीद लगाते हो...
आख़िर ए बँधे तू चाहता क्या है ?
कभी अपने खुदा से भी पूछो,
आखिर उसकी रज़ा क्या है ?

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