दोनों पैरों के फीते,
आपस मे बाँधली है,
साल दर साल,
होसले और विश्वास से,
ये मज़बूत होती जाएगी,
थोड़ा थोड़ा कर के धीरे धीरे,
मंज़िल की ओर बढ़ते रहेंगे,
मगर साथ साथ,
वरना उलझ के गिर पड़ेंगे कभी ।
आपस मे बाँधली है,
साल दर साल,
होसले और विश्वास से,
ये मज़बूत होती जाएगी,
थोड़ा थोड़ा कर के धीरे धीरे,
मंज़िल की ओर बढ़ते रहेंगे,
मगर साथ साथ,
वरना उलझ के गिर पड़ेंगे कभी ।
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