उन्नीसो अठासी की बात है...
शायद कुछ ही दिनो का था मैं...
इसलिए ठीक से कुछ याद नही मुझे...
माँ से पहले शायद आप ही थी...
जिसने मुझे गोद में लिया होगा...
मुझे खिलाया भी होगा...
नींद ना आने पर मुझे लोरी गाकर...
सुलाया होगा...
और नींद आने पर आप...
मेरे पहरेदार बन के...
मेरे इर्द गिर्द खड़े भी रहे होंगे...
मेरी हर इच्छा आपने पूरी की होगी...
मेरी बदमाशियां मम्मी से छिपाई भी होगी...
मेरे बाल भी...
कंघी किये होंगे...
तो कभी मेरे चेहरे पे...
लीपा पोती भी की होगी...
आपके बार बार बुलाने पर ही तो...
अपने नाम को पहचान पाया होऊंगा...
कुछ याद नहीं है मुझे...
पर यकीन से कह सकता हूँ
की ऐसा ही हुआ.....
शायद कुछ ही दिनो का था मैं...
इसलिए ठीक से कुछ याद नही मुझे...
माँ से पहले शायद आप ही थी...
जिसने मुझे गोद में लिया होगा...
मुझे खिलाया भी होगा...
नींद ना आने पर मुझे लोरी गाकर...
सुलाया होगा...
और नींद आने पर आप...
मेरे पहरेदार बन के...
मेरे इर्द गिर्द खड़े भी रहे होंगे...
मेरी हर इच्छा आपने पूरी की होगी...
मेरी बदमाशियां मम्मी से छिपाई भी होगी...
मेरे बाल भी...
कंघी किये होंगे...
तो कभी मेरे चेहरे पे...
लीपा पोती भी की होगी...
आपके बार बार बुलाने पर ही तो...
अपने नाम को पहचान पाया होऊंगा...
कुछ याद नहीं है मुझे...
पर यकीन से कह सकता हूँ
की ऐसा ही हुआ.....
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