Wednesday, 8 March 2017

!! उम्मीद !!

दिन,
मुझे तुमसे उम्मीद है...
सुरंग के दूसरे छोर पर ...
रात इंतज़ार कर रही है...
पर मेरा सच्चा साथी तू है...
थक कर जब राह में,
मैं रुक जाता हू...
तो तू मुझे हौसला देता है...
पीछे देखता हू...
तो यकीन नही होता के...
इतना पास आ गया मंज़िल के...
शाम होते होते...
उमीद कुछ कम हो जाती है...
कुछ देर को ये अकेलापन...
कई सवाल पूछता है...
फिर चुप हो जाता है...
शायद ये सोचकर के अभी...
उम्मीद बाकी है | 

1 comment: