Friday, 10 November 2017

|| शब्द ||

ख़याल उमड़ते रहते है,
दिन-रात...
और राह देखते है, शब्दो से मिलने की,
एक एक अक्षर को जोड़कर...
इन्हे समेटने की कोशिश करता हूँ,
लेकिन बड़े नटखट है ये,
लड़ते है, झगड़ते है आपस में,
तो कभी प्यार से जुड़ जाते है,
कुछ तो गमंड में चूर है...
कुछ सीधे सरल...
कुछ कुछ इंसानो सी ही फ़ितरत है इन शब्दो की...
इस से पहले इनहे कोई बहाना मिल जाए...
खुली दवात के सूखने का,
कागज़ पे इन शब्दो को उतार लेता हूँ |

Sunday, 27 August 2017

!! उसकी रज़ा क्या है ? !!

कभी नारियल लेकर,
तो कभी प्रसाद और हार लेकर,
हर रोज़ इबादत करने जाते हो...
उसके दर पर,
कभी अपना सिर झुकाते हो,
कभी अपनी ख्वाहिशों के लिए...
हर रोज़ उसकी दर पर भटकते हो...
कभी उससे परेशां करते हो...
हर रोज़ आपनी नयी उम्मीद लगाते हो...
आख़िर ए बँधे तू चाहता क्या है ?
कभी अपने खुदा से भी पूछो,
आखिर उसकी रज़ा क्या है ?

Friday, 21 July 2017

!! अलविदा, पर कहता…कैसे !!

घर छोड़ने से कुछ ही दिन पहले सामान बाँध लिया था....
आँखों के सूटकेस में यादो को अच्छी तरह डाल लिया था....
एक दो बार सूटकेस को खोल कर तसल्ली भी कर ली थी....
कि कही कुछ छूट तो नही गया है....
सोचा की अब अलविदा कह लूँ ....
दरवाजे पर पहुँच आखिरी बार देखने को मुड़ा तो मालूम हुआ....
बस कुछ खास सामान ही साथ ले जा रहा हूँ....
अभी तो मकान में बहुत सारा सामान बाकी पड़ा है....
फिर भी, सोचा की अलविदा कह लूँ, पर कहता…कैसे.... |

Wednesday, 31 May 2017

|| दोस्त ||

आज एक बहुत पुराना दोस्त मिला...
पहेले तो मैं उससे पहचान ही नही पाया...
फिर, यादो के पिटारे से धूल हटाई तो याद आया...
साथ में बिताए हुए...वो हसीन पल...
मैंने सोचा...बाकी की बाते चाय पर की जाए...
चाय पीते-पीते मैंने और यादे ताज़ा की...
उस किताब को पढ़ कर...
जो आज सफाई करते वक़्त अलमारी से मिली थी ||

Wednesday, 22 March 2017

!! नानी !!

उन्नीसो अठासी की बात है...
शायद कुछ ही दिनो का था मैं...
इसलिए ठीक से कुछ याद नही मुझे...
माँ से पहले शायद आप ही थी...
जिसने मुझे गोद में लिया होगा...
मुझे खिलाया भी होगा...
नींद ना आने पर मुझे लोरी गाकर...
सुलाया होगा...
और नींद आने पर आप...
मेरे पहरेदार बन के...
मेरे इर्द गिर्द खड़े भी रहे होंगे...
मेरी हर इच्छा आपने पूरी की होगी...
मेरी बदमाशियां मम्मी से छिपाई भी होगी...
मेरे बाल भी...
कंघी किये होंगे...
तो कभी मेरे चेहरे पे...
लीपा पोती भी की होगी...
आपके बार बार बुलाने पर ही तो...
अपने नाम को पहचान पाया होऊंगा...

कुछ याद नहीं है मुझे...
पर यकीन से कह सकता हूँ
की ऐसा ही हुआ..... 

Sunday, 19 March 2017

!! फीते !!

दोनों पैरों के फीते,
आपस मे बाँधली है,
साल दर साल,
होसले और विश्वास से, 
ये मज़बूत होती जाएगी,
थोड़ा थोड़ा कर के धीरे धीरे,
मंज़िल की ओर बढ़ते रहेंगे,
मगर साथ साथ,
वरना उलझ के गिर पड़ेंगे कभी ।

Wednesday, 8 March 2017

!! उम्मीद !!

दिन,
मुझे तुमसे उम्मीद है...
सुरंग के दूसरे छोर पर ...
रात इंतज़ार कर रही है...
पर मेरा सच्चा साथी तू है...
थक कर जब राह में,
मैं रुक जाता हू...
तो तू मुझे हौसला देता है...
पीछे देखता हू...
तो यकीन नही होता के...
इतना पास आ गया मंज़िल के...
शाम होते होते...
उमीद कुछ कम हो जाती है...
कुछ देर को ये अकेलापन...
कई सवाल पूछता है...
फिर चुप हो जाता है...
शायद ये सोचकर के अभी...
उम्मीद बाकी है |