घर छोड़ने से कुछ ही दिन पहले सामान बाँध लिया था....
आँखों के सूटकेस में यादो को अच्छी तरह डाल लिया था....
एक दो बार सूटकेस को खोल कर तसल्ली भी कर ली थी....
कि कही कुछ छूट तो नही गया है....
सोचा की अब अलविदा कह लूँ ....
दरवाजे पर पहुँच आखिरी बार देखने को मुड़ा तो मालूम हुआ....
बस कुछ खास सामान ही साथ ले जा रहा हूँ....
अभी तो मकान में बहुत सारा सामान बाकी पड़ा है....
फिर भी, सोचा की अलविदा कह लूँ, पर कहता…कैसे.... |
आँखों के सूटकेस में यादो को अच्छी तरह डाल लिया था....
एक दो बार सूटकेस को खोल कर तसल्ली भी कर ली थी....
कि कही कुछ छूट तो नही गया है....
सोचा की अब अलविदा कह लूँ ....
दरवाजे पर पहुँच आखिरी बार देखने को मुड़ा तो मालूम हुआ....
बस कुछ खास सामान ही साथ ले जा रहा हूँ....
अभी तो मकान में बहुत सारा सामान बाकी पड़ा है....
फिर भी, सोचा की अलविदा कह लूँ, पर कहता…कैसे.... |