Friday, 23 October 2015

दंगे

हर तरफ ख़ौफ्फ का मंज़र,
इंसान बने जैसे खंजर,
अपने  शहर की ही नब्ज़ काटे,
ना जाने चले किस ओर,
एक ही कलाई से,
बह रही खून की अलग अलग धार है,
धीरे-धीरे आपना रंग खोता खून,
ना जाने कौनसे ग्रुप का है,
बस इतना पता है कि
नेगेटिव है |

Sunday, 20 September 2015

!! कब्रिस्तान !!

गहरा है हर तरफ सन्नाटा,
भय का इकलौता साम्राज्या ये,
समय जैसे थम सा गया यहा...
जीवन जब रात के अंधेरे में सोता है,
इस ख़ौफ्फ के मंज़ार में,
सुकून  की तलाश मे कोई भटकता है,
ख़ौफ्फ उनका मौत से भयानक है,
इंसान की समझ से परे इनकी काया,
कब्रिस्तान में इन का साया...
आत्मा जो कभी मरती नही,
मोक्ष मृत्यु से पहले मिलता नही,
कब्रिस्तान जेसे...
प्रेतों का घराना,
पिशाछो का ठिकाना,
भूतो का साम्राज्या है,
रूहों का जैसे वास...
कब्रिस्तान...

Wednesday, 9 September 2015

!! सपना !!

मेरी बालकनी से उस पहाड़ तक
एक सड़क जाती है ।
टहल रहा हूँ बेफिक्री में
दूर परे नीले रस्ते पे,
चाँद भी साथ साथ
चहलकदमी करता है,
ना जाने साथ देने को या फिर रौशनी!
बोझ नहीं खाली जेबों का,
बस चलता जा रहा हूँ |
दूर परे नीले रस्ते पे,
मेँ थकता नहीं,
पर चाँद तो आखिर चाँद है।
बेचारा थक जाता है |
थोड़ा सास लेता है,
थोड़ा में भी रुक कर,
बादलो को सहला लेता हूँ।
दूर खड़ा वो पहाड़,
सब कुछ देख रहा होता है।
नजदीक जाकर उसे भी,
गले लगाता हूँ।
कुछ पेड़ मिलते हैं,
उनके भी हाल पूछ लेता हूँ |
कितना अच्छा लगता  है यहा,
मुसकान और रंगो से,
अपना बस्ता भर रहा हूँ |
सोच रहा हूँ पूरी दुनिया
खरीद ले ऐसा ही बस्ता,
और चले फिर उस रस्ते पे
महंगे गम बाकी सब सस्ता |
मेरी बालकनी से उस पहाड़ तक
एक सड़क जाती है,
जहां पे मिल जाती हैं
सच्चाइयां सपनों से।


Wednesday, 19 August 2015

!! मेरी लड़ाई !!

आज मेरी लड़ाई हो गई,
आखों में रोष लिए,
आमने-सामने हम दोनो,
मैं ज़रा कमज़ोर था,
पर वो बलिष्ठ, बलवान था,
फिर भी हिम्मत जुटा के ललकार लगाई
दोनो बाजुएँ ऊपर सरका कर,
उसे आखे दिखाई,
वो डरता ना था, पर, 
मुझमें कही डर था,
वो मुझपे टूट पड़ा,
मैं बस बचने की जद्दोज़हद करता रहा,
पर पिटता रहा,
गुस्सा था, पर मैं कमजोर था,
गुहार लगाने से पहले ही,
घरवाले और यार दोस्त नज़र आ गए,
हिम्मत बंधी....
अब मैं बलिष्ठ और वो कमज़ोर था,
वो बचने की जद्दोज़हद करता रहा,
और मैं उसे पीटता रहा,
चित्त कर दिया |
आखिर मैं “समय” से जीत ही गया |

Thursday, 13 August 2015

!! शवयात्रा !!

हर तरफ फेला अंधियारा,
रुधन हे, चारो ओर,
टूटी जो सॅास की डोर,
हर तरफ़ हे, ये शोर,
राम नाम सत्य हे, हरी नाम सत्य हे,
राम नाम सत्य हे, हरी नाम सत्य हे,
आत्मा हो रही परमात्मा में विलीन,
विधि का विधान, या यम का प्रकोप,
देव-दूतो की हँसी के बीच,
कैसा ये शोर,
राम नाम सत्य हे, हरी नाम सत्य हे,
राम नाम सत्य हे, हरी नाम सत्य हे,
लोगो के कंधे पर बोज़ ह्मारा,
पाप-पुण्य की पोटली लिए,
चले छोड़ ये जग सारा,
अब तरफ फेला अंधियारा,
राम नाम सत्य हे, हरी नाम सत्य हे,
राम नाम सत्य हे, हरी नाम सत्य हे |





Monday, 27 July 2015

!! एक योद्धा रावण !!

दादी से सुनी, एक कहानी थी,
जिस में राजा राम और रानी सीता थी...
पर, उस कहानी में कोई और भी था...
महा शक्तिसाली, महा बलवान...
"रावण"....
एक महापुराण में...,
शूरवीर एक योद्धा था रावण...
देव दानव हर पुराण में...
और तीनो लोक में...
उसका ही डंका...
था रावण...
शिव का वो भक्त महान...
महा ज्ञानी, वो था विध्वान...
वो था एक योद्धा रावण...
दानओ का राजा था वो..., 
क्रोध में जब आता था वो, करता नरसंहार...
रावण...
ओम. त्र्यंबाकम यजमहे, सुगंधीं पुष्टि-वर्धानम,
उरवरुकमिवा बंधनन, मृत्योर मुक्शिया ममृितत |

Saturday, 4 July 2015

!! शिवा !!

माथे पर हे चंद्र लगाये,
तन पर आपने भस्म रमाये,
साप से श्रृंगार रचाये,
अखंड योग में लिन हे वो,
शिव शम्भो, शिव शिव शम्भो...
शिव शम्भो...