आज मेरी लड़ाई हो गई,
आखों में रोष लिए,
आमने-सामने हम दोनो,
मैं ज़रा कमज़ोर था,
पर वो बलिष्ठ, बलवान था,
फिर भी हिम्मत जुटा के ललकार लगाई
दोनो बाजुएँ ऊपर सरका कर,
उसे आखे दिखाई,
वो डरता ना था, पर,
मुझमें कही डर था,
वो मुझपे टूट पड़ा,
मैं बस बचने की जद्दोज़हद करता रहा,
पर पिटता रहा,
गुस्सा था, पर मैं कमजोर था,
गुहार लगाने से पहले ही,
घरवाले और यार दोस्त नज़र आ गए,
हिम्मत बंधी....
अब मैं बलिष्ठ और वो कमज़ोर था,
वो बचने की जद्दोज़हद करता रहा,
और मैं उसे पीटता रहा,
चित्त कर दिया |
आखिर मैं “समय” से जीत ही गया |
आखों में रोष लिए,
आमने-सामने हम दोनो,
मैं ज़रा कमज़ोर था,
पर वो बलिष्ठ, बलवान था,
फिर भी हिम्मत जुटा के ललकार लगाई
दोनो बाजुएँ ऊपर सरका कर,
उसे आखे दिखाई,
वो डरता ना था, पर,
मुझमें कही डर था,
वो मुझपे टूट पड़ा,
मैं बस बचने की जद्दोज़हद करता रहा,
पर पिटता रहा,
गुस्सा था, पर मैं कमजोर था,
गुहार लगाने से पहले ही,
घरवाले और यार दोस्त नज़र आ गए,
हिम्मत बंधी....
अब मैं बलिष्ठ और वो कमज़ोर था,
वो बचने की जद्दोज़हद करता रहा,
और मैं उसे पीटता रहा,
चित्त कर दिया |
आखिर मैं “समय” से जीत ही गया |