आज दोस्त एक महखाने में ले गया...
औरो से कुछ अलग था ये महखाना...
एक अलग सी दुनिया थी...
बूढ़ी आखो में जीने का नशा देखा मेने यहा...
ज़िंदगी की टेबल पर...
खुशी के जाम लिए जा रहे थे...
सबके चेहरो पर खुशी थी...
ओर शायद शिकन...
झुर्रियों में बदल गयी थी...
उसी टेबल पर कुछ लोग...
आपने ख़यालो के शॉट्स ले रहे थे...
और कुछ अभी भी बचपन के नशे में डूबे थे...
सिगरेट के धुएं की जगह...
अगरबत्ती का धुंआ था...
शायद इस धुएं में उनकी फिकरें उड़ रही हैं...
सब लोग यहा इतने मस्त थे..
कोई अपने अतीत में जाना ही नहीं चाहता था..
अपने आज की खुमारी को जी रहे है ये लोग...
जब भी आप को समय मिले...
हो आइए इस महकने में...
नाम "वृद्धाश्रम " |
औरो से कुछ अलग था ये महखाना...
एक अलग सी दुनिया थी...
बूढ़ी आखो में जीने का नशा देखा मेने यहा...
ज़िंदगी की टेबल पर...
खुशी के जाम लिए जा रहे थे...
सबके चेहरो पर खुशी थी...
ओर शायद शिकन...
झुर्रियों में बदल गयी थी...
उसी टेबल पर कुछ लोग...
आपने ख़यालो के शॉट्स ले रहे थे...
और कुछ अभी भी बचपन के नशे में डूबे थे...
सिगरेट के धुएं की जगह...
अगरबत्ती का धुंआ था...
शायद इस धुएं में उनकी फिकरें उड़ रही हैं...
सब लोग यहा इतने मस्त थे..
कोई अपने अतीत में जाना ही नहीं चाहता था..
अपने आज की खुमारी को जी रहे है ये लोग...
जब भी आप को समय मिले...
हो आइए इस महकने में...
नाम "वृद्धाश्रम " |