Wednesday, 1 March 2017

!! गणित !!

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ज़िंदगी की गणित
अभी सिख रहा हू
बस जो सपने है मेरे 
उसे आगे के लिए बचा लेता हू...
खुशी के जो पल हे, उन्हे जोड़ता हू..
और गम को गटा लेता हू...
और आज तक का हिसाब फिर से "शून्य" |

Sunday, 26 February 2017

!! दोस्त !!

कैसे भूलु वो दिन जो बिताए यारो के साथ,
वो कॅफेटीरिया की मस्ती,
वो यारो का प्यार,
वो जिन्दादिली,
वो यारो का साथ,
वो बाइक की रेस,
वो लड़की वाला केस, 
वो सर का डाटना, वो बंक मारना,
वो प्रॉमिस, जो प्रॉमिस रह गये,
कैसे भूलु वो दिन जो बेटाए यारो के साथ,
वो बियर पीकर टल्ली होना,
वो यारो क सांग भांगड़ा पाना,
वो बारिश की पहली बूँध,
वो बाइक की चाबी छुपा कर बोलना, अब ढूंड,
वो पहला प्यार,
वो लेना दोस्तो से पैसे उधार,
वो एग्ज़ॅम का टेंशन, वो कूल रहना का  टशन,
वो यारो के संग टुर, अब सब है मुझसे दूर,
कैसे भूलु वो दिन जो बिताए यारो के साथ |




Friday, 24 February 2017

!! मां !!

तेरी हर एक बात आज याद आती है,
तू पास नही तो, तेरी याद सताती है,
मैं कभी देखलता नही, पर तुझसे,
बहुत प्यार करता हू मां,
तेरा वो डाटना, वो धूप लगने पर,
आँचल में ढक लेना,
रात मैं नींद ना आए तो,
गोद मैं लेकर कहानी सुनना,
तेरी हर एक बात आज याद आती है,
तू पास नही तो तेरी याद सताती ह,
मेरे साथ परीक्षा मैं रात भर जागना,
मेरी खुशी के लिए सब कुछ तयाग्ना, 
कैसे चुका पाउँगा, मैं वो क़र्ज़,
वो एहसान जो तुमने मुझ पर किए है मां,
तेरी हर एक बात आज याद आती है,
तू पास नही तो तेरी याद सताती है |

Sunday, 19 February 2017

!! अर्जी !!

एक अर्जी देने दर पर आया था मलिक तेरे...
तुज़से फरियाद करने वालो की कतार बड़ी लंबी है...
मूज़े पता है दर पर तेरे रिश्वत चलती नही...
पर फिर भी, कुछ रिश्वत लेकर आया हू...
कुछ दुआए तेरे पास रखी है मेरी, ओर कुछ सजदे साथ लाया हू...
वक़्त मिले तो देख लेना अर्जी मेरी...
मैं तेरे दर पर ही ठहरा हू |

Thursday, 16 February 2017

!! माहीने !!

जो कभी सच्ची दोस्त थी...
अब महीनो, उसे मुलाकात नही होती...
ज़िंदगी के माहीने बदल गये है, शायद...
अभी भी मिलने के इंतज़ार में...
शीशों के पीछे से हसरातो से तकती है...
यादे धुंधली सी देखाई पड़ती है अब...
वो किताबो के साथ बिताई सोहबतो वाली शामे....
अब कंप्यूटर के सामने बीत जाती है |

Sunday, 20 November 2016

!! केस !!

ज़िंदगी के इस सफ़र में,
एक दिन मेरी भी सुनवाई  होगी,
उन अनगिनत लाल फीते मे बँधी,
अनेक ज़िंदगियो की फाइल से मेरी फाइल  निकाली जाएगी,
उस जज के सामने,
जो फैसले देता है,
स्टाम्प पेपर पे लिखे समझौतों,
और शर्तों का,
पैदा होते ही हर शख्स से,
जिस पर दस्तख़त लिए जाते है।

Sunday, 25 September 2016

!! बाज़ार !!

आज इतवार है..
चलो आपको गाव का हॉट गुमा लाउ...
ये है यहा का हॉट...
दूर दूर से वायापारी आते है यहा...
चलो, इन व्यापारियों के बारे में बताता हूँ।
ये नामी मिठाई की दुकान;
माल कुछ खास नहीं,
बस नाम से चल रही है।
वो कहते है ना...
उची दुकान फीका पकवान,
ये चाट बाज़ार;
सिर्फ वही लोग आते हैं
जिन्हें चटकारे पसन्द है।
ये बीज़ू बानिए की दुकान,
फिक्स ग्राहक हैं इनके।
हर महीने का राशन उठाते हैं यहाँ से।
वो पन्ना सेठ की दुकानें;
खुद आराम फरमाते हैं
और दूसरों के काम पर कमाते हैं।
ये खिलोने की दुकान,
बच्चों का मंन खूब लुभाती है...
इस दुकान पर इतना शोर क्यो???
अरे ये तो मुखौटे की दुकान है,
आज कल बहोत चलती है..
लोग यहा मुखौटा लेने आते है..
खुशी के, दुख के...
इस साहित्य के इस बाज़ार में
एक कोने में छोटी सी दुखन मेरी है..
आज कल चलती नही है..
इस लिए धूल मिट्टी लगी है...
कोई आता नही...
आजकल मुस्कुराहते कोई खरीदता नही है....