Sunday, 20 November 2016

!! केस !!

ज़िंदगी के इस सफ़र में,
एक दिन मेरी भी सुनवाई  होगी,
उन अनगिनत लाल फीते मे बँधी,
अनेक ज़िंदगियो की फाइल से मेरी फाइल  निकाली जाएगी,
उस जज के सामने,
जो फैसले देता है,
स्टाम्प पेपर पे लिखे समझौतों,
और शर्तों का,
पैदा होते ही हर शख्स से,
जिस पर दस्तख़त लिए जाते है।

Sunday, 25 September 2016

!! बाज़ार !!

आज इतवार है..
चलो आपको गाव का हॉट गुमा लाउ...
ये है यहा का हॉट...
दूर दूर से वायापारी आते है यहा...
चलो, इन व्यापारियों के बारे में बताता हूँ।
ये नामी मिठाई की दुकान;
माल कुछ खास नहीं,
बस नाम से चल रही है।
वो कहते है ना...
उची दुकान फीका पकवान,
ये चाट बाज़ार;
सिर्फ वही लोग आते हैं
जिन्हें चटकारे पसन्द है।
ये बीज़ू बानिए की दुकान,
फिक्स ग्राहक हैं इनके।
हर महीने का राशन उठाते हैं यहाँ से।
वो पन्ना सेठ की दुकानें;
खुद आराम फरमाते हैं
और दूसरों के काम पर कमाते हैं।
ये खिलोने की दुकान,
बच्चों का मंन खूब लुभाती है...
इस दुकान पर इतना शोर क्यो???
अरे ये तो मुखौटे की दुकान है,
आज कल बहोत चलती है..
लोग यहा मुखौटा लेने आते है..
खुशी के, दुख के...
इस साहित्य के इस बाज़ार में
एक कोने में छोटी सी दुखन मेरी है..
आज कल चलती नही है..
इस लिए धूल मिट्टी लगी है...
कोई आता नही...
आजकल मुस्कुराहते कोई खरीदता नही है....

Friday, 12 August 2016

!! PEACE !!

Let's get together and pray...
for, the children who are crying...
for the people who died...
for the people who suffered...
and, try to make a peaceful world,
By spreading Love...
Let's get together and pray...
for, the lustful eye...
for, the ego and pride...
for, the envy guys...
and, try to make a peaceful world,
By spreading Love...

Tuesday, 22 March 2016

!! रंग !!

होली का रंग बिखर रहा ह चारो ओर,
तेरा सवाल बड़ा मासूम सा लगा मुझे,
होली पर रंग लगाने के लिए रंग लाउ,
तेरे और मेरे दरमियाँ,
कभी प्यार की चुहलबाजी करते,
जो भी रंग फूट पड़े...
बस एसा रंग चाहिए, 
कहीं रंग फीका ना रह जाए,
अपनी अपनी रूह से, अच्छे से घोंट लेंगे।
और बारी बारी एक ही पिचकारी से...
रंग देंगे |

Tuesday, 23 February 2016

रोज़गार

चलो, महीने की एक छुट्टी दे दूंगा,
पर सिर्फ एक ही मिलेगी।
पूरे महीने काम करना होगा।
चाहे आधा अधूरा ही मन हो,
पर काम करना होगा |
पैसे ! पैसो का तुम्हे क्या काम,
रहने को पनाह दे दूंगा,
तुम्हे घूमने की पूरी आज़ादी है,
बस काम इतना करना है,
उसकी खैरियत लेते रहना है, रोज़,
ऐ चाँद! अब तू बेरोज़गार नहीं।

Monday, 18 January 2016

दीवार घड़ी

साल दो साल में ऐसा हो ही जाता है मेरे साथ,
ज़िन्दगी रुक सी जाती है, चलती नही मेरे हिसाब से |
चलते चलते थक जाता हूँ,
हांफने लगता हूँ,
और फिर रुक जाता हूँ |
और ये ज़िंदगी,
बहुत दूर निकल लेती है,
फिर स्प्रिंट लगानी पड़ती है
उसके बराबर आने को |

बाज़ार से सैल लाया हूँ अभी,
दीवार घड़ी कल से बन्द पड़ी है |

Friday, 23 October 2015

दंगे

हर तरफ ख़ौफ्फ का मंज़र,
इंसान बने जैसे खंजर,
अपने  शहर की ही नब्ज़ काटे,
ना जाने चले किस ओर,
एक ही कलाई से,
बह रही खून की अलग अलग धार है,
धीरे-धीरे आपना रंग खोता खून,
ना जाने कौनसे ग्रुप का है,
बस इतना पता है कि
नेगेटिव है |